इराक़: प्रधानमंत्री निवास पर ड्रोन हमले की कड़ी निन्दा

इराक़ मे संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMI) ने प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा अल काज़मी के हत्या प्रयासों की “कड़े शब्दों में” निन्दा की है. ध्यान रहे कि बीती रात, राजधानी बग़दाद में बेहद कड़ी सुरक्षा वाले उनके घर पर ड्रोन से हमला किया गया था जिसमें काज़मी बाल-बाल बच गए.

मीडिया ख़बरों के अनुसार, विस्फोटकों से भरे ड्रोन हमले में, प्रधानमंत्री के निवास को नुक़सान पहुँचा है और उनके निवास पर तैनात कुछ सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं.

मुस्तफ़ा अल काज़मी ने मई 2020 में, देश के प्रधानमंत्री का पद सम्भाला था.

राजधानी बग़दाद का ग्रीन ज़ोन इलाक़ा बहुत उच्च सुरक्षा वाला समझा जाता है जहाँ सरकारी दफ़्तरों के साथ-साथ, अन्य देशों के दूतावास भी स्थित हैं.

अभी किसी व्यक्ति या समूह ने, तक इस ड्रोन हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं की है. इस हमले की जाँच के दौरान, उस ड्रोन हमले में इस्तेमाल किये गए विस्फोकों के अवशेष बरामद कर लिये गए हैं.

देश में संयुक्त राष्ट्र के सहायता मिशन ने एक वक्तव्य में कहा है, “मिशन इस बात पर अपनी राहत और प्रसन्नता व्यक्त करता है कि इस ड्रोन हमले में, प्रधानमंत्री को कोई चोट नहीं पहुँची है.”

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने भी एक वक्तव्य में, इस ड्रोन हमले की कड़ी निन्दा की है, और इस अपराध के लिये ज़िम्मेदार तत्वों को, जवाबदेह ठहराकर, न्याय के कटघरे में लाने का आहवान किया है.

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश की तरफ़ से जारी एक वक्तव्य में कहा गया है, “महासचिव ने सभी इराक़ियों से, अधिकतम संयम बरतने और हिंसा व इराक़ को अस्थिर किये जाने के प्रयासों से दूर रहने का आग्रह किया है.” 

“उन्होंने तमाम राजनैतिक दलों से संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखने और अपने तमाम मतभेद, शान्तिपूर्व व समावेशी सम्वाद के ज़रिये सुलझाने का आग्रह भी किया है.”

आतंकवाद और हिंसा के लिये कोई जगह नहीं

वक्तव्य में कहा गया है, “आतंकवाद, हिंसा और ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों को, इराक़ की स्थिरता को कमज़ोर करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पटरी से उतारने की इजाज़त नहीं दी जा सकती.”

इराक़ के प्रधानमंत्री को निशाना बनाकर किये गए इस हमले की ईरान सरकार, और अमेरिका ने भी निन्दा की है.

ग़ौरतलब है कि अक्टूबर में हुए संसदीय चुनावों के नतीजों के विरोध में, शुक्रवार को ग्रीन ज़ोन इलाक़े में हुए विरोध प्रदर्शनों ने, प्रदर्शनकारियों व सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों के बाद हिंसक हिंसक रूप ले लिया था.

ख़बरों के अनुसार, एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई थी, और अनेक सुरक्षाकर्मी भी ज़ख़्मी हुए थे. प्रधानमंत्री ने, हिंसा के लिये ज़िम्मेदार कारणों की जाँच के आदेश दिये हैं.

अक्टूबर में हुए संसदीय चुनावों में, शिरकत कम ही रही थी और केवल 41 प्रतिशत मतदान हुआ था. 

संसदीय परिणामों के अनुसार, ईरान की तरफ़ झुकाव रखने वाले दलों के समर्थकों और मिलिशिया को हार का सामना करना पड़ा है. ख़बरों के अनुसार, प्रदर्शनकारी सरकार, व देश के स्वतंत्र चुनाव आयोग से, मतगणना फिर से कराए जाने की मांग कर रहे हैं.

संयम की अपील

यूएन मिशन और प्रधानमंत्री ने, सभी से आने वाले दिनों के दौरान, शान्ति और अधिकतम संयम बनाए रखने का आहवान किया है.

यूएन मिशन ने, इसके अतिरिक्त, सभी पक्षों को, तनाव कम करने की ज़िम्मेदारी निभाने और राजनैतिक तनाव को कम करने व राष्ट्रीय हित की ख़ातिर, सम्वाद में शामिल होने के लिये पुरज़ोर तरीक़े से प्रोत्साहित किया है.

यूएन मिशन के वक्तव्य में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र ऐसे सभी इराक़ियों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर मुस्तैद है जो शान्ति व स्थिरता की चाह रखते हैं; उन्हें यह पाने का हक़ है.

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