इथियोपिया: मानवाधिकार हनन मामलों की जाँच के लिये, अन्तरराष्ट्रीय आयोग

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद में शुक्रवार को हुए एक मतदान में सर्वसहमति से, इथियोपिया में मानवाधिकार हनन व दुराचार के गम्भीर मामलों की जाँच, किसी अन्तरराष्ट्रीय एजेंसी से कराए जाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई है.

शुक्रवार को, योरोपीय संघ के अनुरोध पर, इथियोपिया के उत्तरी क्षेत्र – टीगरे में 13 महीने पहले शुरू हुई लड़ाई के प्रभावों पर चर्चा के लिये, एक विशेष सत्र आयोजित किया गया. 

इस सत्र में शिरकत करने वाले प्रतिनिधियों को बताया गया कि उस क्षेत्र में हर 10 में से 9 लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है.

किसी विशेष सत्र का आयोजन कराने के अनुरोध को, परिषद के 47 में से कम से कम एक तिहाई की सहमति होना ज़रूरी है.

ये विशेष सत्र ऐसे समय में आयोजित किया गया जब इथियोपिया के उत्तरी क्षेत्र में, हाल के समय में लड़ाई में आई तेज़ी ने, ज़्यादा बड़े इलाक़ों को अपनी चपेट में ले लिया है और इनसे पूरे देश व उससे भी आगे – ‘हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका’ की स्थिरता के लिये ख़तरा उत्पन्न हो गया है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की उप उच्चायुक्त नदा अल नशीफ़ ने परिषद के इस विशेष सत्र में कहा कि ऐसी सम्भावना है कि टीगरे क्षेत्र में, चार लाख से भी ज़्यादा लोग, अकाल जैसे हालात में रहने को मजबूर हैं.

ध्यान रहे कि जून में संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता एजेंसियों द्वारा सहायता कार्य शुरू करने के बावजूद, सीमित राहत पहुँचाने की ही इजाज़त दी गई है.

युद्धविराम की पुकार

इथियोपिया के उत्तरी क्षेत्र में भड़की लड़ाई से उत्पन्न संकट ने, लाखों लोगों को तत्काल मानवीय सहायता का ज़रूरतमन्द बना दिया है.
© UNICEF/Christine Nesbitt
इथियोपिया के उत्तरी क्षेत्र में भड़की लड़ाई से उत्पन्न संकट ने, लाखों लोगों को तत्काल मानवीय सहायता का ज़रूरतमन्द बना दिया है.

मानवाधिकार उप उच्चायुक्त ने युद्धरत पक्षों से, युद्धविराम लागू करने की अन्तरराष्ट्रीय पुकारों पर ध्यान देने का आहवान भी किया. 

उन्होंने ध्यान दिलाया कि इथियोपिया के उत्तरी क्षेत्रों में लड़ाई के कारण, टीगरे, अमहारा और अफ़ार क्षेत्रों में कम से कम 20 लाख लोग विस्थापित हुए हैं. इनमें से बहुत से लोगों को जीवित रहने के लिये, जिस सहायता की आवश्यकता है, वो भी उन्हें नहीं मिल रही है.

उनका यह सम्बोधन ऐसे समय में आया है जब इथियोपिया के हालात की जाँच के लिये, मानवाधिकार विशेषज्ञों का एक अन्तरराष्ट्रीय आयोग बनाने के एक प्रस्ताव के मसौदे पर मतदान भी हुआ.

इस प्रस्ताव को 21 देशों का समर्थन मिला, 15 देशों ने इसके विरोध में मतदान किया और 11 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

इस प्रस्ताव के अनुसार इस अन्तरराष्ट्रीय जाँच आयोग में तीन मानवाधिकार विशेषज्ञ होंगे जिनकी नियुक्ति मानवाधिकार परिषद के अध्यक्ष द्वारा होगी. शुरू में इस आयोग का कार्यकाल एक वर्ष होगा जो बढ़ाया भी जा सकता है.

यह आयोग संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय और इथियोपिया के मानवाधिकार आयोग की शिरकत से बनी संयुक्त जाँच टीम द्वारा पहले से ही किये गए जाँच कार्य को आगे बढ़ाएगा.

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