इण्टरव्यू: विनाश व महामारी के बीच नए महासभा प्रमुख का 'उम्मीद भरा सन्देश'

संयुक्त राष्ट्र के 76वें सत्र के लिये महासभा अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद ने कहा है कि दुनिया भर में, कोविड-19 महामारी, विनाश, हिंसक टकराव से जूझ रहे अरबों लोगों के लिये आशा की रौशनी की सख़्त ज़रूरत है. उन्होंने यूएन न्यूज़ की पॉलीना कूबिएक के साथ एक विशेष इण्टरव्यू में बताया कि संयुक्त राष्ट्र के सबसे प्रतिनिधिक अंग के रूप में महासभा, लोगों में उम्मीदों का संचार करने के लिये सबसे बेहतर स्थिति में है.   

यूएन महासभा का 76वाँ सत्र मंगलवार, 14 सितम्बर को आरम्भ हो रहा है. 

इस सत्र के लिये निर्वाचित महासभा अध्यक्ष और मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद के मुताबिक़ जनरल ऐसेम्बली एकमात्र ऐसा अंग है, जिसमें सभी 193 देशों का प्रतिनिधित्व है और यूएन का यह अंग, जब सर्वमत से बोलता है, मुद्दों पर निर्णय लेता है, तो वह अन्तरराष्ट्रीय अन्तरात्मा का द्योतक होता है.

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और कोविड-19 टीकों के न्यायसंगत वितरण जैसे मुद्दों पर, वह उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ेंगें कि मानवता, चुनौती के अनुरूप क़दम उठा सकेगी. 

अब्दुल्ला शाहिद ने इन मुद्दों की अहमियत के बारे में चर्चा की और बताया कि सवा पाँच लाख की आबादी वाले उनके देश मालदीव के लिये उनकी अध्यक्षता के क्या मायने हैं. 

अब्दुल्ला शाहिद, अब संयुक्त राष्ट्र के एक ऐसे अंग का प्रतिनिधित्व करेंगे, जोकि विश्व की सात अरब 90 करोड़ आबादी की ओर से बात रखी जाती है.

यह इण्टरव्यू प्रकाशन ज़रूरतों के लिये सम्पादित किया गया है. 

यूएन न्यूज़: जनरल ऐसेम्बली के अध्यक्ष के रूप में आपकी उम्मीदवारी को आशा की थीम के इर्द-गिर्द बुना गया. कोविड-19 की लगातार जारी लहरों, वैक्सीन्स की विषमतापूर्ण सुलभता और दुनिया भर में जारी हिंसक टकरावों के मद्देनज़र, आप महासभा में किस तरह उम्मीद की लहर दौड़ाना चाहते हैं?

अब्दुल्ला शाहिद: मैंने आशाओं पर आधारित अध्यक्षता के लिये प्रचार किया, चूँकि मेरा वास्तव में मानना है कि विनाश, हताशा और पिछले 18 महीनों में देखी गई पीड़ा के मद्देनज़र, समय आ गया है कि, दुनिया के एक ऐसे संगठन के तौर पर, जिसमें पूर्ण अन्तरराष्ट्रीय समुदाय समाया है, सभी 193 देश, यह समय उठ खड़े होने का और अपने लोगों को उम्मीद बंधाने का है.    

चार्टर कहता है, “हम लोग” (We the Peoples), इसलिये यह समय है कि हम लोग एक साथ आकर आशा का संचार करें, जिसकी लोगों को सख़्त ज़रूरत है.

महामारी के इस भयावह दौर में, हमने मानवता का सर्वश्रेष्ठ रूप देखा है.

हमने यह अग्रिम मोर्चे पर जुटे कर्मचारियों के गम्भीर बलिदानों में देखा है, हमने डॉक्टरों, नर्सों को देखा है, अनेक, अनेक ऐसे साधारण व्यक्तियों को देखा है जिन्होंने दूसरों की सहायता के लिये अपना जीवन ख़तरे में डाल दिया. यह उम्मीद है. यह मानवता को उम्मीद प्रदान करती है.

काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य के गोमा में, कोविड-19 की वैक्सीन के टीकाकरण अभियान को, कोवैक्स कार्यक्रम के तहत, टीके मुहैया कराए गए हैं.
© UNICEF/Ariette Bashizi
काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य के गोमा में, कोविड-19 की वैक्सीन के टीकाकरण अभियान को, कोवैक्स कार्यक्रम के तहत, टीके मुहैया कराए गए हैं.

हमने देखा है कि वैक्सीन रिकॉर्ड समय में विकसित की गई हैं – जिनसे संयुक्त राष्ट्र के लिये एक साथ आने की आशा मिलती है... और पुनर्बहाली शुरू होती है जिसकी अब ज़रूरत है. यह एकता ही है जो कि हमें सम्बल प्रदान करती है.

मालदीव में, मैं जहाँ का रहने वाला हूँ, हम हर दिन जलवायु परिवर्तन, बढ़ते समुद्री जलस्तर के ख़तरे झेल रहे हैं, मगर हम यह उम्मीद कभी नहीं छोड़ेंगे कि मानवता, समय की ज़रूरत के अनुसार क़दम उठाएंगी. कि हम बच जाएंगे. 

यह मालदीव के लोकाचार में है कि हम बेहतरी की दिशा में प्रयास करते हैं, हम बेहतर करने का प्रयास करते हैं... एक बेहतर कल की कोशिशों के लिये.

यूएन न्यूज: आपने जलवायु परिवर्तन मुद्दे को छुआ. आप मालदीव से हैं, एक लघु द्वीपीय विकासशील देश. आपकी अध्यक्षता के दौरान इस मुद्दे पर आपकी क्या प्राथमिकताएँ हैं?

अब्दुल्ला शाहिद: मैं 76वें सत्र को प्रकृति के लिये एक सुपर सत्र बनाने के बारे में बात करता आ रहा हूँ, और इसकी एक वजह है. 76वें सत्र के साथ, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण पर अन्य कई बड़े सम्मेलन हो रहे हैं.

कॉप26, रियो की तीन सन्धियों से तीन बड़े सम्मेलन, जैवविविधित पर कॉप, वन उन्मूलन पर कॉप और उच्चस्तरीय ऊर्जा सम्वाद पर कॉप, और महासागरों पर सम्मेलन. 

ये सभी बड़े सम्मेलन इस आगामी सत्र में प्रयासों को गति देने जा रहे हैं. मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि अध्यक्ष के तौर पर मैं अपनी आयोजक क्षमता का उपयोग, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को एक साथ लाने में करूँ.

इसे अन्तत: और आगे बढ़ाने के लिये.

उदाहरण के तौर पर, कॉप26 के आयोजन से पहले, मैं अक्टूबर में, महासभा में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित करना चाहता हूँ ताकि देशों के पास एक साथ आने और अन्तिम राजनैतिक संकल्प प्रदान करने का अवसर हो.

हाँ, हम 1.5 डिग्री के लिये प्रतिबद्ध हैं [कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लिये तापमान बढ़ोत्तरी सीमित करने का लक्ष्य].

हाँ, 100 अरब डॉलर के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है. हाँ, पेरिस समझौता [जलवायु परिवर्तन पर] क्रियान्वित किया जा सकता है. हाँ, हमें मानवता की परवाह है. कि हम पृथ्वी ग्रह का रुदन सुनेंगे.

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, दायरे में वैश्विक और पैमाने में असाधारण हैं जो फ़सलों के लिये जोखिम पैदा करने वाले मौसम के बदलते मिज़ाज, से लेकर समुद्रों के बढ़ते स्तर तक में नज़र आते हैं.
WMO/Shravan Regret Iyer
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, दायरे में वैश्विक और पैमाने में असाधारण हैं जो फ़सलों के लिये जोखिम पैदा करने वाले मौसम के बदलते मिज़ाज, से लेकर समुद्रों के बढ़ते स्तर तक में नज़र आते हैं.

हम यह हर साल देख रहे हैं. हम देख रहे हैं कि हमारी पृथ्वी कितनी पीड़ा से गुज़र रही है. हम विकराल बाढ़ों, असहनीय गर्म मौसम, जंगलों में आग देख रहे हैं.

आप नाम लीजिये, हम उसे घटता देख रहे हैं. इसलिये यह समय, संयुक्त राष्ट्र के लिये एक साथ आने का, और उम्मीद का सन्देश आगे बढ़ाने का है कि, हाँ, मानवता जीवित रहेगी.

यूएन न्यूज़: एक अन्य बेहद महत्वपूर्ण प्राथमिकता कोविड-19 है. आपकी अध्यक्षता के दौरान इसके लिये आपके क्या लक्ष्य हैं?

अब्दुल्ला शाहिद: इस पद पर मेरा चुनाव होने के बाद, और मैं यहाँ जनरल ऐसेम्बली में बोल रहा था, मैंने दुनिया के टीकाकरण के बारे में बात की. चूँकि यह बेहद स्पष्ट है कि कोई भी तब तक सुरक्षित नहीं है, जब तक हर कोई सुरक्षित नहीं है.

यह कह देना आसान है, मगर इसे किया जा सकता है. मेरा विश्वास है कि यह सम्भव है चूँकि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के पास क्षमता है... सिर्फ़ यह कह देना पर्याप्त नहीं है कि कोई भी तब तक सुरक्षित नहीं है, जब तक हर कोई सुरक्षित नहीं है. 

अगर हम साथ आ सकते हैं, हम दुनिया के टीकाकरण में सफल हो सकेंगे... 2022 के अन्त तक, हम इसे पूरा कर पाएंगे. मेरी मंशा, इस वर्ष के अन्त में या फिर अगले साल के शुरू में, एक वैक्सीन कार्यक्रम आयोजित करने की है.  

एक बार फिर, देशों को साथ लाकर स्थिति का जायज़ा लेने और आगे का रास्ता निर्धारित करने के लिये.

यूएन न्यूज़: हमने उन कुछ बड़े मुद्दों पर चर्चा की है जो कि दुनिया के समक्ष फ़िलहाल मौजूद हैं. सुरक्षा परिषद से इतर, जनरल ऐसेम्बली किस तरह बदलाव ला सकती है, चूँकि इसके पास लागू करवाने के लिये शक्तियों का अभाव है?  

अब्दुल्ला शाहिद: मेरा ईमानदारी से यह मानना है कि जनरल असेम्बली की प्रवर्तन (Enforcement) क्षमता, सुरक्षा परिषद से कहीं अधिक है. यह प्रवर्तन सदस्यता के ज़रिये आता है.

जनरल ऐसेम्बली एकमात्र ऐसा अंग है, जिसमें 193 सदस्य देशों को प्रतिनिधित्व प्राप्त है, और यह अंग जब एक सुर में बोलता है, मुद्दों पर निर्णय लेता है, तो अन्तरराष्ट्रीय चेतना का प्रतीक होता है.

इसलिये, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जनरल ऐसेम्बली कामकाज करे; प्रतिक्रिया के बजाय स्थिति पर क़ाबू पाने के लिये पहले से ही सक्रिय प्रयास हों; असरदार प्रयास हों; ताकि शेष दुनिया, हमें, स्पष्ट सन्देश मिले.

यूएन महासभा के नए प्रमुख अब्दुल्ला शाहिद का महासभा सभागार में साक्षात्कार.
UN Photo/Eskinder Debebe
यूएन महासभा के नए प्रमुख अब्दुल्ला शाहिद का महासभा सभागार में साक्षात्कार.

जनरल ऐसेम्बली मानक स्थापित करती है, जनरल ऐसेम्बली आगे का रास्ता दिखाती है, और जनरल असेम्बली लकीर खींचती है कि क्या स्वीकार्य है और क्या नहीं है. 

इसलिये, मेरा विश्वास है कि संयुक्त राष्ट्र और दुनिया का सबसे अहम अंग, यूएन जनरल ऐसेम्बली है. इसके पास मानकों को गढ़ने का नैतिक प्राधिकार है.

यूएन न्यूज़: इसी से जुड़ा एक सवाल, चूँकि आपने दक्षता, एकता के बारे में बात की, आप महासभा अध्यक्ष के रूप में अपने पद का उपयोग, एकता को साकार करने में किस तरह करेंगे?

अब्दुल्ला शाहिद: मैं समझता हूँ कि हमारे बीच मतभेद होंगे, हमारे बीच विचारों का अन्तर होगा, विभिन्न मुद्दों पर हमारी अलग-अलग राय होगी. 

मगर संसद के अध्यक्ष के तौर पर मेरे कार्यकाल और मेरे संसदीय अनुभव ने मुझे दिखाया है कि सम्वाद के ज़रिये मुद्दों को सुलझा पाना सम्भव है.

यह ज़रूरी है कि हम बातचीत जारी रखें, कि हम मिल बैठने का अवसर तलाश करें, एक दूसरे तक अपनी बात पहुँचाएँ, और फिर हम मुद्दों का निपटारा करने में सक्षम हो सकेंगे.

अगर आप दुनिया का इतिहास देखें, हमने देखा है कि हिंसक संघर्ष तब फूटते हैं, जब सम्वाद के लिये अवसर ख़त्म हो जाते हैं, जब लोग अपने आप को बन्द करने और एक दूसरे से दूर होने का निर्णय लेते हैं.

यह असेम्बली लोगों को एक साथ जोड़ती है, एक दूसरे के साथ सम्पर्क व सम्वाद का अवसर प्रदान करती है, और हमें इसका अधिकतम इस्तेमाल करना होगा.

यूएन न्यूज़: आपने मालदीव में अपनी सरकार का ज़िक्र किया. आपके विदेश मंत्रालय में, आप लैंगिक बराबरी सुनिश्चित कर पाने में सफल रहे. यहाँ आपके अध्यक्षीय कार्यालय में आपके क्या लक्ष्य हैं?

अब्दुल्ला शाहिद: मैंने मालदीव में अपने मंत्रालय का अनुभव यहाँ अपने कैबिनेट में लाने का निर्णय लिया, इसलिये मेरे कैबिनेट में लैंगिक सन्तुलन है.

अनेक वरिष्ठ पदों पर महिलाएँ हैं और मैंने यह संकल्प लिया है, और फिर से यह प्रतिज्ञा लेता हूँ कि मैं किसी ऐसे पैनल में नहीं बैठूँगा, जो कि लैंगिक रूप से सन्तुलित नहीं होगा.

मैं यह भी सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि मैं इस बारे में ज़्यादा से ज़्यादा बात करुंगा. मैं संयुक्त राष्ट्र को ना सिर्फ़ स्वर्णिम मानक गढ़ने वाला बनाना चाहता हूँ, बल्कि उन स्वर्णिम मानकों का पालन करने वाला भी.

इस सन्दर्भ में, मेरी मंशा महासचिव और सचिवालय के साथ बातचीत करने और संयुक्त राष्ट्र को, परिवार के लिये ज़्यादा अनुकूल बनाने की है. मैं इस कार्य को आगे बढ़ाना चाहता हूँ.  

मैं महिलाओं पर उस परामर्शदाता समूह के साथ आगे बढ़ूँगा, जिसे पूर्व अध्यक्ष [वोल्कान] ने गठित किया था.

मेरी इच्छा महिला स्थाई प्रतिनिधियों के साथ भी नियमित सत्र आयोजित करने की है ताकि मैं उनके विचारों से लाभान्वित हो सकूँ. मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि लैंगिक मुद्दा, मेरी अध्यक्षता के दौरान शीर्ष प्राथमिकताओँ में शामिल रहे.

यूएन न्यूज़: एक माँ के तौर पर मुझे बेहद जिज्ञासा है, कि संयुक्त राष्ट्र को परिवार-अनुकूल बनाने के लिये आपके विचार हैं?

अब्दुल्ला शाहिद: अपने प्रचार के दौरान, मैं एक महिला राजदूत से मिला, और उन्होंने एक भयावह कहानी बताई, कि जब एक दिन उनके बच्चे की देखभाल करने वाली आया नहीं आ पाई, तो उनके पास अपने दो बच्चों को कार में लाने और यूएन गैराज में ड्राइवर के साथ छोड़ देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.

यहाँ एक पारिवारिक कक्ष होना चाहिये जहाँ बच्चों की देखभाल कर पाना सम्भव हो, और हमें इन्हीं मुद्दों का ख़याल रखना है.

यूएन न्यूज़: मेरा आख़िरी सवाल युवाओं के बारे में है. जनरल ऐसेम्बली के सभागार में जो कुछ भी हो रहा है, आप उसमें युवा भावना किस तरह लाना चाहेंगे?

अब्दुल्ला शाहिद: यूएन जनरल ऐसेम्बली में शामिल होने का मेरा पहला अनुभव 1988 का है, जब मैं एक युवा राजनयिक था. 

उन वर्षों के दौरान मेरे इसी अनुभव ने मुझे बहुपक्षवाद के लिये संकल्पित किया. मैं यहाँ जनरल असम्बेली, यहाँ गलियारों और समितियों में जो कुछ देखता हूँ, उसने मुझे विश्वास दिलाया कि बहुपक्षवाद ही एकमात्र आगे बढ़ने वाला रास्ता है.

मैं यह अवसर उन देशों के राजनयिकों को प्रदान करना चाहता हूँ जिनका प्रतिनिधित्व कम है और इसलिये, मैंने महासभा अध्यक्ष युवा फ़ैलोशिप कार्यक्रम की शुरुआत की है. 

मैं कम प्रतिनिधित्व वाले देशों से युवा राजनयिकों को यहाँ लाकर, मेरे कार्यालय में काम करने का अवसर प्रदान करना चाहता हूँ, ताकि वे भी यहाँ के कामकाज का अनुभव प्राप्त कर सकें.

इस कार्य के समन्वय की ज़िम्मेदारी मेरे कार्यालय की है और वर्ष के अन्त में, उन्हें एक प्रमाणपत्र दिया जाएगा, यह साबित करने के लिये, कि उन्होंने अपनी ज़िम्मेदारी बख़ूबी निभाई है.

मालदीव में सूर्योदय और घने काले बादल एक साथ.
WMO/Ahmed Shuau
मालदीव में सूर्योदय और घने काले बादल एक साथ.

मगर कौन जाने, शायद इन्हीं में से फ़ैलोशिप पाने वाले कोई एक युवा राजनयिक, भविष्य में जनरल ऐसेम्बली के अध्यक्ष बन जाएँ. 

हमें फ़िलहाल बहुपक्षवाद में निवेश करने की ज़रूरत है. कोविड-19 ने फिर से दर्शाया है कि आगे बढ़ने के लिये बहुपक्षवाद ही एकमात्र रास्ता है. बहुपक्षवाद में सर्वोत्तम निवेश, युवाओं में निवेश करना है. और मैं यही करने जा रहा हूँ.

यूएन न्यूज़: आपकी अध्यक्षता के, आपके देश मालदीव के लिये क्या मायने हैं?

अब्दुल्ला शाहिद: मैं यह पद, सामने आने वाली चुनौतियों को भली-भाँति समझते हुए ही सम्भाल रहा हूँ. मुझसे कई बार पूछा गया है, आपने अपना नाम इस व्यस्त समय में क्यों सामने रखा?

मैं कहूँगा कि यह मेरा सर्वश्रेष्ठ फ़ैसला है.

क्योंकि यह एक ऐसा अवसर है जहाँ आप बदलाव ला सकते हैं और एक ऐसा अवसर है जहाँ मालदीव जैसा छोटा देश बदलाव ला सकता है.

मालदीव के लोगों के लिये यह एक बड़ा सम्मान है. जनरल ऐसेम्बली का सभापतित्व मालदीव के एक नागरिक के लिये बेहद ख़ास है.

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