इण्टरव्यू: एक साथ मिलकर महासागरों की देखभाल करने का आग्रह

‘विश्व महासागर दिवस’ हर वर्ष 8 जून को मनाया जाता है, जोकि हमारे दैनिक जीवन में महासागरों की महत्वपूर्ण भूमिका पर फिर से ध्यान दिलाने का एक अवसर है. वर्ष 2022 की थीम, ऊर्जा का पुन: संचार: महासागरों के लिये सामूहिक कार्रवाई (Revitalization: collective action for the ocean) के ज़रिये उनकी रक्षा के लिये साथ मिलकर प्रयास किये जाने की अहमियत को रेखांकित किया जा रहा है.

जून के अन्तिम दिनों में, पुर्तगाल के लिस्बन शहर में दूसरा संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन आयोजित होगा, जिसका उद्देश्य विज्ञान-आधारित नवाचारी समाधानों और संगठित कार्रवाई को बढ़ावा देना है, ताकि महासागरों के लिये वैश्विक कार्रवाई में एक नया अध्याय लिखा जा सके.

पुर्तगाल और केनया के संयुक्त आयोजन में यह सम्मेलन, महासागरों के समक्ष उपस्थित चुनौतियाँ के समाधान की तलाश करने के लिये एक मंच मुहैया कराएगा.

संयुक्त राष्ट्र में पुर्तगाल की स्थाई प्रतिनिधि ऐना पाउला ज़कारियस और केनया के स्थाई प्रतिनिधि मार्टिन किमानी की महासागर में गहरी दिलचस्पी है. दोनों प्रतिनिधि इस मिशन भी साझा नज़रिया रखते हैं: सर्वजन के टिकाऊ विकास हेतु महासागरों, समुद्रों और समुद्री संसाधनों का संरक्षण और सतत उपयोग.

दोनों प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन के लिये पुर्तगाल के लिये रवाना होने से पहले, यूएन न्यूज़ के साथ न्यूयॉर्क में विस्तार से चर्चा की और बताया कि देशों व दुनिया के लिये इस आयोजन के क्या मायने हैं.

यह इण्टरव्यू स्पष्टता व संक्षिप्तता के लिये सम्पादित किया गया है.

यूएन न्यूज़यूएन महासागर सम्मेलन, केनया और पुर्तगाल, दोनों के लिये क्या प्रदर्शित करता है – और इस आयोजन से क्या अपेक्षाएँ हैं?

ऐना पाउला ज़कारियस: यह पुर्तगाल के लिये एक आधारभूत सम्मेलन है. महासागर हमारे इतिहास, हमारी संस्कृति, हमारे भौतिक भूदृश्य, और हमारी अर्थव्यवस्था से बहुत अधिक जुड़ा हुआ है.

साथ ही, बहुपक्षवाद को मज़बूती देने, महासागर एजेण्डा को आगे ले जाने के हमारे संकल्प से भी एक जुड़ाव है, और यह जलवायु परिवर्तन सम्बन्धी सवालों से भी जुड़ा है.

हमें विश्व भर से 12 हज़ार प्रतिभागियों के पहुँचने की आशा है, और 15 राष्ट्राध्यक्षों व सरकार प्रमुखों के शामिल होने की पुष्टि हो चुकी है.

इसके अलावा, अनेक ग़ैर-सरकारी संगठन, नागरिक समाज प्रतिनिधि, शिक्षाविद, युवा संगठनों और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे.

जलवायु विषय पर अमेरिका के विशेष दूत जॉन कैरी, और कलाकार व पर्यावरणविद जेसन मोमोआ (एक्वामैन) समेत अन्य कुछ जानी-मानी हस्तियाँ भी, लिस्बन में शिरकत करेंगी, जोकि युवजन की आवाज़ को शक्ति प्रदान देने की दृष्टि से अहम है.

मार्टिन किमानी: यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण अवसर और दायित्व को प्रदर्शित करता है. सतत आर्थिक विकास का एक अवसर, बेहतर खाद्य सुरक्षा, और विश्व भर में युवजन के लिये रोज़गार के अवसर.

और दायित्व इसलिये चूँकि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि महासागरों की प्रदूषण व जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से रक्षा की जाए.

हेती के दक्षिणी तट पर जहाज़.
© Unsplash/Caleb George
हेती के दक्षिणी तट पर जहाज़.

सह-मेज़बानों के तौर पर, केनया और पुर्तगाल इस सम्मेलन से एक साहसिक व सकारात्मक वैश्विक महासागर एजेण्डा को उभरते हुए देखने के लिये उत्सुक हैं.

महासागरों के स्वास्थ्य में आई गिरावट की दिशा को पलटने की ज़रूरत और टिकाऊ विकास के 14वें लक्ष्य को हासिल करने की अहमियत को पहचाना गया है.

इस क्रम में, केनया और पोर्तुगल संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर, उन निर्णयों के लिये एक मंच तैयार कर रहे हैं, जिनसे विज्ञान व नवाचार के आधार पर महासागर के लिये कार्रवाई का दायरा व स्तर बढ़ाया जा सकेगा.

यूएन न्यूज़: महासागर प्रदात्ता हैंकेनया के ग्रामीण इलाक़ों में तटीय आबादी की आजीविका के लिये, जोकि मत्स्य पालन व कृषि पर निर्भर है; और पुर्तगाल, जिसकी एक लम्बी तट रेखा है और महासागरों के साथ एक मज़बूत व फलप्रद सम्बन्ध हैं. हम तटीय समुदायों व उनकी आजीविका की रक्षा किस प्रकार से सुनिश्चित कर सकते हैं?  

मार्टिन किमानी: केनया की तटीय रेखा प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है, जिनमें मैनग्रोव वन, प्रवाल भित्तियाँ, जंगल, रेतीले तट, और समुद्री घास समेत अन्य संसाधन हैं.

इनसे जैवविविधता और उत्पादन में काम आने वाल जल की उपलब्धता बढ़ती है, जिससे अर्थव्यवस्थाओं और आजीविकाओं को समर्थन प्रदान किया जा सकता है.

सरकार ने तटीय समुदायों के साथ नज़दीकी रूप से काम करते हुए, आर्थिक अवसरों, सामाजिक संरक्षा के सिलसिले में तटीय समुदायों के कल्याण को प्राथमिकता दी है.

इसके साथ ही, प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से सहनक्षमता सुनिश्चित की जा सकेगी, और महासागर संसाधनों के आवश्यकता से अधिक दोहन व जोखिम भरे तौर-तरीक़ों के इस्तेमाल को कम किया जा सकेगा.

उदाहरणस्वरूप, Mikoko Pamoja परियोजना (किस्वाहिली भाषा में अर्थ: मैनग्रोव एक साथ) एक समुदाय आधारित ब्लू कार्बन क्रेडिट योजना है, जिसे केनया के दक्षिणी तटीय इलाक़े में चलाया जा रहा है.

केनया के समुद्री व मत्स्य शोध संस्थान के तकनीकी समर्थन के ज़रिये, तटीय समुदाय, क्षरण का शिकार हुए मैनग्रोव को फिर से रोपने, उनकी पुनर्बहाली और प्रबन्धन के लिये प्रयास कर रहे हैं.

कार्बन को सोखने और उसके भण्डारण में मैनग्रोव बेहद सहायक हैं जोकि जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध लड़ाई में अहम है.  

यह परियोजना वर्ष 2013 से कार्बन क्रेडिट में लेनदेन कर रही है. इससे प्राप्त होने वाले राजस्व के ज़रिये जल व साफ़-सफ़ाई, शिक्षा और पर्यावरण सरंक्षण में सामुदायिक परियोजनाओं को समर्थन दिया जाता है.

वास्तव में इस परियोजना के ज़रिये, स्थानीय लोगों का सशक्तिकरण हुआ है और अब वे लोकतांत्रिक ढंग से व्यय और निवेश सम्बन्धी निर्णय ले सकते हैं, जैसेकि स्कूल की नई किताबों, फ़र्नीचर को ख़रीदना.

तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, एक अरब से अधिक लोगों के लिये भोजन व आजीविका का स्रोत हैं.
UNCTAD
तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, एक अरब से अधिक लोगों के लिये भोजन व आजीविका का स्रोत हैं.

कार्बन के दंश को कम करने पर लक्षित इस परियोजना का अब अफ़्रीका के अन्य मैनग्रोव क्षेत्रों मे विस्तार किया जा रहा है.

ऐना पाउला ज़कारियस: यह परियोजना, इस सम्मेलन के केन्द्र में मौजूद एक बुनियादी अवसर को रेखांकित करती है. हमें डेटा के साथ यह दर्शाने और साबित करने की ज़रूरत है कि महासागर और जलवायु के बीच सम्बन्ध है, चूँकि हम जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना कर रहे स्थानीय समुदायों के साथ जो हासिल करना चाहते हैं, उनके लिये ये दोनो घटक बेहद अहम हैं.

समाधान की तलाश करने में उनकी भागीदारी अति आवश्यक है. और उन समाधानों को टिकाऊ होना होगा, जिसमें उनकी आजीविकाओं का भी ध्यान रखा जाए. हमें स्थानीय व क्षेत्रीय सरकारों के साथ-साथ सभी हितधारकों के साथ एक सम्वाद स्थापित करने की ज़रूरत है, चूँकि हम जो कुछ कर सकते हैं, उसमें उनकी भी बात सुनी जानी चाहिये.

इसलिये हम सम्मेलन के दौरान एक विशेष कार्यक्रम (Localizing Action for the Ocean: Local and Regional Governments) का आयोजन कर रहे हैं, जोकि इस बात पर ध्यान केन्द्रित करता है कि स्थानीय समुदायों के साथ हम किस तरह बातचीत कर सकते हैं, उनके ज्ञान का लाभ उठा सकते हैं, और संसाधनों का टिकाऊ इस्तेमाल सुनिश्चित कर सकते हैं.

यूएन न्यूज़: आपके देश किस तरह से एक 'नील अर्थव्यवस्था (Blue Economy) की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, और यह सम्मेलन किस तरह से उस लक्ष्य में योगदान देगा?

ऐना पाउला ज़कारियस: पृथ्वी पर जीवन के लिये महासागरों की बुनियादी भूमिका हैं. वे भोजन के साथ-साथ, हमारे जीवन के लिये आवश्यक कई अन्य अहम बातों का भी ध्यान रखते हैं.

हम उल्लास व आनन्द, पर्यटन, खेलकूद, समुद्री परिवहन और अन्य अनेक विषयों में महासागरों पर निर्भर हैं, और सामुदायिक जीवन में महासागर, जीवन की सततता प्रदान करते हैं.

मुझे बहुत आशा है कि यह सम्मेलन इसे मज़बूती प्रदान करेगा, और इस क्रम में टिकाऊ ब्लू इकॉनॉमीके विषय पर एक इण्टरएक्टिव सम्वाद का आयोजन भी किया जाएगा.

जब हम टिकाऊ ब्लू इकॉनॉमी की बात करते हैं, हमें मत्स्य पालन, जैवविविधता के अलावा समुद्र की तह में मौजूदा सम्पदा के विषय में भी सोचना है.

महासागर हमें विशाल सम्पदा प्रदान करते हैं, जिनका हम लाभ उठा सकते हैं, मगर हमें बेहद सतर्कता बरतने की भी ज़रूरत होगी कि नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्रों से छेड़छाड़ ना की जाए.

हमें प्रदूषण के मुद्दे को भी ध्यान में रखना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि हमें दोनों हाथों से उस सम्पदा को तो प्राप्त करें ही, लेकिन साथ ही महासागरों की हर तरह से ज़रूरी देखभाल भी की जाये.

मार्टिन किमानी: केनया ने महासागरों के टिकाऊ इस्तेमाल और ब्लू इकॉनॉमी के लिये संसाधनों को प्राथमिकता दी है और इसे ‘Vision 2030’ को साकार करने के इरादे से अहम माना है.

केनया एक महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है, और ब्लू इकॉनॉमी से, खाद्य व पोषण सुरक्षा, तटीय व ग्रामीण विकास और आय के स्रोतों के ज़रिये, हमारे आर्थिक विकास में योगदान मिलने की सम्भावना है.

सेशेल्स ने अपने समुद्री पर्यावरण के 30 फ़ीसदी हिस्से की रक्षा के लिये अपने प्रयास शुरू किये हैं.
ICS/Craig Nisbet
सेशेल्स ने अपने समुद्री पर्यावरण के 30 फ़ीसदी हिस्से की रक्षा के लिये अपने प्रयास शुरू किये हैं.

राष्ट्रीय प्रयासों से इतर, केनया महासागर सम्बन्धी ख़तरों व चुनौतियों पर एक साझा रुख़ विकसित करने में क्षेत्रीय व अन्तरराष्ट्रीय समुदाय का भी एक इच्छुक साझीदार है.

वैश्विक जल क्षेत्र का दो-तिहाई हिस्सा उन क्षेत्रों में है, जोकि राष्ट्रीय न्यायिक अधिकार क्षेत्र से बाहर स्थित हैं. इस पृष्ठभूमि में सभी के लिये एक साथ मिलकर काम करना ज़रूरी हो जाता है, ताकि विकास के लिये वित्त पोषण और डेटा के आदान-प्रदान को सुनिश्चित किया जा सकेगा.

यूएन न्यूज़: युवा उद्यमी गम्भीर समस्याओं पर नवाचार, विज्ञान-आधारित समाधानों के साथ काम कर रहे हैं, और इस नज़रिये से युवजन की लिस्बन में भूमिका अहम होगी. आप महासागरों को बचाने के प्रयासों और इस सम्मेलन में युवजन की भागीदारी को किस तरह देखते हैं?

मार्टिन किमानी: युवजन की भूमिका को पहचानते हुए, हम महासागर युवजन फ़ोरम भी आयोजित कर रहे हैं, जोकि सम्मेलन के दौरान एक विशेष आयोजन होगा. इसके ज़रिये महासागर कार्रवाई और युवजन के नेतृत्व में टिकाऊ विकास के 14वें लक्ष्य से सम्बन्धित समाधानों को विशाल स्तर पर लागू करने के लिये एक प्लैटफ़ॉर्म के रूप में काम करेगा.   

बेरोज़गारी, विशेष रूप से केनया के तटीय इलाक़ों में, युवाओं को अपराध, मादक पदार्थों और हिंसक चरमपंथ व कट्टता की ओर धकेलती है, जिस माहौल में आतंकवाद फलता-फूलता है.

तटीय इलाक़ों में प्रबन्धन इकाईयाँ सामुदायिक स्तर पर औपचारिक व अनौपचारिक शैक्षिक पृष्ठभूमियों से आने वाले युवाओं की भर्तियाँ करती हैं. उन्हें संरक्षण प्रयासों के लिये प्रशिक्षण दिया जाता है और वे सामाजिक उपक्रम अवसर हासिल होते हैं और मछली पालन के ज़रिये सतत आय भी.

केनया सरकार ने भी समुद्री क्षेत्र में युवजन को शिक्षित व प्रोत्साहित करने के लिये संकल्प व्यक्त किया है, ताकि महासागर संसाधनों से प्राप्त होने वाले वाणिज्यिक फ़ायदे बढ़ाए जा सकें.

ऐना पाउला ज़कारियस: और हमने जलवायु कार्रवाई से जुड़े विषयों में युवजन की भागीदारी की प्रासंगिकता को देखा है.

मेरे विचार में युवा पीढ़ी के पास उनके जीवन, भविष्य और उनके बच्चों के जीवन के लिये उपजने वाली चुनौतियों के प्रति गहरी समझ है. इसलिये, यह परम आवश्यक है कि युवजन को महासागरों के सतत इस्तेमाल सम्बन्धी बातचीत में भी शामिल किया जाए.

और जैसाकि राजदूत किमानी ने कहा, युवजन फ़ोरम एक ऐसी नवाचारी फ़ोरम होगी, जिसके ज़रिये हम ज्ञान व कार्रवाई के विभिन्न क्षेत्रों से युवाओं को एक साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं, और फिर उन्हें महासागरों व उनकी प्रासंगिकता के बारे में नवाचारी ढंग से सोचने का अवसर दिया जाएगा.  

युवा उद्यमियों और जलवायु व महासागर कार्यकर्ताओं का यहाँ होना बहुत अहम है, जो इस एजेण्डा में विशाल योगदान दे सकते हैं.

इसलिये हमें आशा है कि इस फ़ोरम में उनकी भागीदारी से वे उन समाधानों को साथ ला सकेंगे, जिन्हें ना केवल सरकारों द्वारा बल्कि यूएन के स्तर पर भी उपयोग में लाया जा सकेगा.

यूएन महासागर सम्मेलन के सह-मेज़बान: पुर्तगाल की राजदूत ऐना पाउला ज़कारियस और केनया के राजदूत मार्टिन किमानी.
UN Photo/Mark Garten
यूएन महासागर सम्मेलन के सह-मेज़बान: पुर्तगाल की राजदूत ऐना पाउला ज़कारियस और केनया के राजदूत मार्टिन किमानी.

यूएन न्यूज़: इस वर्ष के सम्मेलन से टिकाऊ विकास के लिये महासागर विज्ञान के यूएन दशक के लिये महत्वाकांक्षा का स्तर भी निर्धारित होगा. अगले चरण में कौन से क़दम होंगे, ताकि लिस्बन के बाद भी स्वस्थ महासागर की दिशा में आगे बढ़ना जारी रखा जा सके?

मार्टिन किमानी: विज्ञान हमें बताता है कि महासागर, मानवता के भविष्य के लिये अति-महत्वपूर्ण हैं और उनके स्वास्थ्य-कल्याण को मानव गतिविधियों से सबसे बड़ा ख़तरा है.

हम लगातार महासागर प्रणाली पर दबाव बढ़ा रहे हैं, जिससे विशाल अवसरों व महासागरीय संसाधनों के लिये कठिनाई खड़ी होती है. देशों को तत्काल एक वैश्विक तंत्र के लिये प्रतिबद्धता जताने की आवश्यकता है और एक समय-आधारित फ़्रेमवर्क को लागू किया जाना होगा, जोकि वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया हो.

इससे देशों के लिये संरक्षण व दोहन के बीच सन्तुलन साध पाना और जवाबदेही तय कर पाना सम्भव होगा. हमें वैज्ञानिक शोध में भी निवेश करने की आवश्यकता होगी, जिससे वैश्विक खाद्य व पोषण सुरक्षा, समुद्री नियोजन, और जलवायु परिवर्तन प्रबन्धन में योगदान मिलेगा. जैसाकि मैंने कहा है कि यह महासागर सम्मेलन, रूपान्तरकारी बदलावों को सुनिश्चित करने में हमारी महत्वाकांक्षा के स्तर को मापेगा.

दुनिया को जल्द से जल्द अच्छी ख़बर की ज़रूरत है, ताकि वैश्विक महामारी, युद्ध और जलवायु परिवर्तन के दबावों के इस दौर में कुछ आशा का संचार हो सके. उन्हें लिस्बन में हमारी बैठक को एक ऐसी मशाल के रूप में देखना होगा जोकि कारगर व असरदार बहुपक्षीय कार्रवाई का मार्ग दिखाएगी. हम यह सुनिश्चित करने का पूरा प्रयास करेंगे.

ऐना पाउला ज़कारियस: इस सम्मेलन की मेज़बानी निसन्देह हमारे लिये और केनया में हमारे मित्रों के लिये, एक बड़ा प्रयास है. एक ऐसे समय में जब चुनौतियाँ बढ़ रही हैं, जैसाकि अक्सर हमें ध्यान दिलाया जाता है, यह क्षण महासागारों पर चर्चा करने का है और इन सभी घटकों पर जलवायु, टिकाऊ विकास, प्रवासन व सुरक्षा के सन्दर्भ में चर्चा करने का है.

उदाहरण के तौर पर, जब हम अनेक प्रशान्त द्वीपों में परिस्थितियों को देखते हैं, तो हम लोगों द्वारा महसूस की जा रही कठिनाइयों को देखते हैं, जिनमें टकराव की सम्भावना भी बढ़ रही है, चूँकि संसाधन सीमित मात्रा में हैं.

यह सम्मेलन दूसरा बड़ा आयोजन है, जिसे इस विषय पर आयोजित किया गया है और हमें उम्मीद है कि कम से कम एक और आयोजना होगा. तीसरा सम्मेलन महासागार विज्ञान पर यूएन दशक के सन्दर्भ में आयोजित किया जाना चाहिये.

इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन, जैवविविधता फ़्रेमवर्क पर वार्ताओं में, हमें इन सभी घटकों को एक साथ लाना होगा, ताकि हम अलग-थलग रहकर काम करने के बजाय समग्र रूप से काम कर पाएँ, और इन सभी एजेण्डा को एक समय में आगे बढ़ा सकें.

भावी पीढ़ियों के लिये एक बेहतर, सुरक्षित और अधिक टिकाऊ विश्व की हमारी आकांक्षा के लिये यह एक बुनियादी बात है.

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