आपबीती: ‘मैंने तस्करी के 1000 से भी अधिक पीड़ितों को बचाया है’

संयुक्त राष्ट्र के मानव तस्करी निरोधक मामलों की एक विशेषज्ञ रिदा सरगीडियेन ने यूएन न्यूज़ को बताया है कि उन्होंने मानव तस्करी के एक हज़ार से भी ज़्यादा पीड़ितों को बचाने में सक्रिय भूमिका निभाई है, जो मुख्य रूप से पूर्वी योरोप और मध्य एशिया क्षेत्र में थे. रिदा संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध निरोधक कार्यालय (UNODC) में काम करती हैं और लिथुआनिया पुलिस फ़ोर्स में बीस वर्षों तक काम करने के बाद, मध्य एशिया में मानव तस्करी और प्रवासी तस्करी निरोधक विशेषज्ञता पर क्षेत्रीय सलाहकार हैं.

“लिथुआनिया में राष्ट्रीय मानव तस्करी निरोधक कार्यालय (UNODC) की प्रमुख के रूप में मेरा काम बहुत चुनौतीपूर्ण था, मगर बहुत दिलचस्प भी. मैं देशीय और अन्तरराष्ट्रीय पुलिस अभियान चलाती थी और जाँच-पड़ताल करती थी जिनके ज़रिये पीड़ितों की पहचान करना और उन्हें छुड़ाया जाता था.

हमें किसी ख़ास जगह पर सम्भावित शोषण के कुछ मामले होने की जानकारी मिलती थी जिनमें लिथुआनियाई नागरिक पीड़ित हो सकते थे. उसके बाद हम देश में क़ानून लागू करने वाले अधिकारियों से सम्पर्क करते थे और बचाव अभियान संगठित करते थे.

हमें बहुत तेज़ी से काम करना होता था और एक जगह से दूसरी जगह पहुँचने के लिये तैयार रहना होता था. मैंने बहुत से ऐसे दिन भी देखे हैं जब मेरा नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन अलग-अलग देशों में होते थे.

क्षतिग्रस्त ज़िन्दगियाँ

कभी-कभी तो मैं रूप और भेस बदलकर काम करती थी और पुलिस यूनीफ़ॉर्म में नहीं होती थी. मुझे याद है एक बार मुझे ब्रिटेन में एक पीड़ित के पीछे, अपनी ऊँची एड़ियों वाली जूतियों में ही दौड़ना पड़ा था. मैं बहुत सावधान थी कि कहीं मैं अपनी टांग ही ना तोड़ डालूँ.

उस समय लिथुआनिया के आपराधिक गुट, देश में और विदेशों में, मानव तस्करी में बहुत सक्रिय थे. उनके बहुत अच्छे सम्बन्ध और साठ-गाँठ - अल्बानिया के संगठित आपराधिक गुटों के साथ थे, जो पूरे योरोप में अपना धन्धा चला रहे थे.

मैंने हिसाब लगाया कि मैं मानव तस्करी के एक हज़ार से ज़्यादा पीड़ितों को बचाने में शामिल रही हूँ. उसके बाद तो मैंने गिनती ही बन्द कर दी. इतनी सारी क्षतिग्रस्त ज़िन्दगियाँ थीं. मुझे ज़िन्दगियाँ बचाने के लिये विशेष पुलिस पुरस्कार भी मिला.

मैं 22 वर्षों की सेवा के बाद और क्षेत्र में सम्भवतः सबसे ऊँचे मुक़ाम पर पहुँचने के बाद, पुलिस से रिटायर हो गई. इस तरह वर्ष 2020 तक, समय आ गया था – अन्तरराष्ट्रीय स्तर की तरफ़ रुख़ करने का और अपना ज्ञान, कुशलता व अनुभव बाँटने का.

मध्य एशिया में तस्करी का बढ़ता ज्ञान

अब उज़बेकिस्तान के ताशकन्त में काम करने के लिये मेरा शासनादेश कुछ अलग है. जितनी शक्ति मुझे एक राष्ट्रीय पुलिस अधिकारी के रूप में हासिल थी, अब ऐसा नही है, मगर यूएन ड्रग्स व अपराध निरोधक कार्यालय की तरफ़ से मुझे, मध्य एशिया में अधिकारियों के साथ सहयोग करने और मानव तस्करी के मामलों का पता लगाने व उनकी जाँच करने  क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने मे तकनीकी सहायता करने की सामर्थ्य हासिल है.

मैं इस अपराध के बारे में काफ़ी-कुछ जानती हूँ – ये किस तरह संगठित किया जाता और तस्करों के काम करने के क्या तरीक़े हैं. मगर मेरी नई भूमिका में सफल होने के लिये, यही पर्याप्त नहीं था. 

मध्य एशिया में मानव तस्करी और प्रवासियों की तस्करी मामलों पर UNODC की क्षेत्रीय सलाहकार - रिदा सरगीडियेन
UNODC
मध्य एशिया में मानव तस्करी और प्रवासियों की तस्करी मामलों पर UNODC की क्षेत्रीय सलाहकार - रिदा सरगीडियेन

मध्य एशिया में पहुँचने के बाद मुझे क्षेत्र की बारीक़ियों को समझना था और मानव तस्करी के सन्दर्भ में, सांस्कृतिक व क़ानूनी पृष्ठभूमि का भी ख़याल रखना था.

मुझे क्षेत्र में इस अपराध का मुक़ाबला करने के लिये, विभिन्न प्रक्रियाओं व संसाधनों और अन्वेषण के उपलब्ध उपकरणों के बारे में समझ हासिल करनी थी.

अब मैं क़ानून लागू करने वाले अधिकारियों व न्याय क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को प्रशिक्षण देती हूँ और उनका पथप्रदर्शन करती हूँ, ग़ैर-सरकारी संगठनों को परामर्श देती हूँ और तस्करी के शिकार लोगों को सहायता मुहैया कराती हूँ. साथ ही मानव तस्करी के ख़िलाफ़ क़ानून व प्रक्रियाएँ विकसित करने में सहयोग देती हूँ.

जिस किसी चीज़ की भी ज़रूरत हो, मैं यहाँ मदद करने के लिये मुस्तैद हूँ.

तस्करी के तमाम रूपों का अन्वेषण

आधिकारिक आँकड़ों की बात करें तो मध्य एशिया से लोगों को तस्करी करके जिन देशों में ले जाया जाता है उनमें रूस, कज़ाख़स्तान, और दक्षिण कोरिया प्रमुख हैं.

ज़्यादातर जाँच यौन शोषण के मामलों की होती है, और कुछ मामले श्रम शोषण के लिये तस्करी के भी पता चले हैं.
मैं अधिकारियों को तस्करी के अन्य मामलों की जाँच शुरू करने के लिये भी प्रोत्साहित कर रही हूँ, मसलन जबरन शादी, जबर भीख मंगवाना और जबरन आपराधिक या फिर हथियारबन्द गुटों की गतिविधियों में शामिल करना.

साथ ही, आधिकारिक आँकड़ों से मालूम होता है कि तस्करी के अपराधों में जिन लोगों का अपराध साबित होता है, विशेष रूप में यौन शोषण के मामलों में, उनमें दोषी साबित होने वाली ज़्यादातर महिलाएँ होती हैं. मैं इसके बारे में और ज़्यादा जानकारी हासिल करना चाहती हूँ, क्योंकि मेरा मानना है कि इन महिलाओं के पीछे ऐसे पुरुष हो सकते हैं जो तस्करी के धन्धे के वास्तविक संचालक हैं. ये एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ परम्परागत रूप से पुरुष ही आगे रहते हैं.

लोगों को वादों के जाल में फँसाना

मैं कहूँगी कि आज के दौर में तस्कर बहुत नफ़ासत के साथ काम करते हैं और वो बहुत होशियार होते हैं.

वो हिंसा के प्रयोग पर बहुत भरोसा नहीं करते हैं. वो पीड़ितों को बहुत मीठी बातों और आकर्षक वादों के ज़रिये या पुरुष मित्र बनकर उन्हें अपने जाल में फँसाते हैं.

मैंने अपने करियर की शुरूआत में ऐसे क्रूर मामले देखे जिनमें पीड़ितों को या तो लटकाया गया या उन्हें पीटा गया, कुछ मामलों में तो मौत भी हुई. मैंने उनके शरीरों पर हिंसा के निशान देखे. कुछ अन्य मामलों में, पीड़ितों को ड्रग्स दिये गए और उसके बाद उनका यौन शोषण किया गया.

मैंने लिथुआनिया में बेघर पुरुषों के एक मामले पर काम किया. जाँच में मालूम हुआ कि उन्हें शराब पिलाई गई, स्पेन ले जाया गया, और दूरदराज़ के एक इलाक़े में खेतों में काम करने के लिये विवश किया गया. रात मे उन्हें ज़जीरों से बान्ध दिया जाता था ताकि वो भाग ना सकें.

तस्करों के तरीक़े ना केवल बहुत नफ़ासत भरे हैं, बल्कि उनके अपराध से बहुत से लाभ भी सृजित होते हैं.

मेरे लिये ये काम, हमेशा ही मानवाधिकारों के संरक्षण के बारे में रहेगा. ये ऐसा काम है जो मैं बहुत अच्छी तरीक़े से जानती हूँ.”

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