आतंकवाद के पीड़ितों को निजेर में मिली शरण, यूएन प्रमुख ने प्रवक्ता होने का दिलाया भरोसा  

सूरज की तेज़ धूप, रेत, धूल भरी हवाओं और शुष्क परिस्थितियों में अस्थाई रूप से बनाए गए शरण स्थलों में इस्तेमाल की गई शीट का रंग उड़ चुका है. दोपहर का समय है और तापमान असहनीय रूप से 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है. 

निजेर अफ़्रीका में सर्वाधिक गर्म देशों में हैं और यहाँ ऊआल्लम ज़िला, सबसे गर्म स्थानों में से है. ऊआल्लम में बारिश कभी-कभार ही होती है, मगर हिंसा व आतंकी गतिविधियों से त्रस्त लोगों को यहाँ शरण मिल सकती है.

उत्तरी निजेर के दो अन्य ज़िलो समेत ऊआल्लम में लगभग 28 हज़ार लोगों को आश्रम प्राप्त है, जोकि अफ़्रीका के सहेल क्षेत्र में हिंसा और आतंकवादी हमलों के कारण अपना घर छोड़कर जाने के लिये मजबूर हुए हैं.  

उत्तर में स्थित पड़ोसी देश माली से लगभग आठ हज़ार शरणार्थी आए हैं, जबकि देश के भीतर 18 नज़दीकी गाँवों व नगरों से 20 हज़ार से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं.

इनमें से एक ज़ाकउ सिड्डो हैं, जो एक अध्यापक हैं और ऊआल्लम से 80 किलोमीटर दूर स्थित एक गाँव से जान बचाकर आए हैं. 

उन्होंने बताया कि, “12 लोग तब मारे गए जब मेरे गाँव पर 14 नवम्बर 2020 को हमला किया गया. मवेशियों व हमारे खाद्यान्न भण्डारों को चुरा लिया गया और कुछ घरों में आग लगा दी गई है.”

“हमने तब ऊआल्लम जाने का निर्णय लिया जिसे सुरक्षित माना जाता है.”

ऊआल्लम में, ज़ाकउ सिड्डो क्षेत्र के अन्य विस्थापित समुदायों के साथ पहुँचे, जोकि अपने गाँवों को छोड़कर आए हैं और जहाँ स्कूल व सड़के सुनसान हैं. बहुत से बच्चे तो वर्ष 2017 से ही स्कूल नहीं गए हैं. 

उन्होंने माली से आए शरणार्थियों से भी मुलाक़ात की है, जिनमें अमीनाटा वालेट इस्साफ़ीइटाने भी हैं, जो ऊआल्लम में महिला शरणार्थी समिति की प्रमुख हैं, और यहाँ अपने जन्म स्थान से दस वर्ष पहले भागकर आई थीं.  

ऊआल्लम में महिला शरणार्थी समिति की प्रमुख अमीनाटा वालेट इस्साफ़ीइटाने वहाँ 10 वर्षों से रह रही हैं.
UN News/Daniel Dickinson
ऊआल्लम में महिला शरणार्थी समिति की प्रमुख अमीनाटा वालेट इस्साफ़ीइटाने वहाँ 10 वर्षों से रह रही हैं.

आजीविका व जीवन पर जोखिम

उन्होंने भी हिंसा व लूट की व्यथा को साझा करते हुए बताया कि वह एक ख़ानाबदोश और चारागारों पर निर्भर समुदाय से हैं, लेकिन जब सशस्त्र गुटों ने उनके मवेशियों को चुरा लिया तो उनका भाग्य बदल गया.

अन्य अनेक शरणार्थियों और विस्थापितों की तरह, उनके समुदाय को अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. 

“हमने अपने आपको शिथिल लोगों में तब्दील कर लिया है; हम गम्भीर सूखे और जल के अभाव के बावजूद ढलने की कोशिश कर रहे है, जोकि हमें फ़सल उगाने से रोकता है.”

“हमारे पास जो कुछ मवेशी हैं, वे अब चारागाह ढूँढने में असमर्थ हैं, जिसकी वजह से हमें भोजन की कमी का सामना करना पड़ता है.” 

निजेर की कुल ढाई करोड़ आबादी का लगभग 80 फ़ीसदी हिस्सा, अपने जीवन-व्यापन के लिये कृषि पर निर्भर है.

विविध चुनौतियाँ

ऊआल्लम और उसके आस-पास के ज़िलों में परिस्थितियाँ, निजेर के समक्ष मौजूद चुनौतियों को दर्शाती हैं.

निजेर, एक भूमिबद्ध (landlocked) पश्चिम अफ़्रीकी देश जहाँ क़रीब दो लाख 64 हज़ार निजेर वासी आन्तरिक रूप से विस्थापित है, जिसके लिये बदहाल सुरक्ष व्यवस्था, बदलती जलवायु परिस्थितियाँ, वनों की कटाई समेत अन्य कारकों को ज़िम्मेदार बताया गया है. 

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी का कहना है कि अन्य पड़ोसी देशों से आए ढाई लाख से अधिक शरणार्थी भी निजेर में रहते हैं.

यूएन एजेंसियों और साझीदार संगठन, निजेर में मानवीय राहत व विकास के लिये समर्थन मुहैया करा रहे हैं. 

एक अनुमान के अनुसार, 68 लाख लोग लम्बे समय से खाद्य असुरक्षा का शिकार हैं और उनके पास खाने के लिये पर्याप्त भोजन नहीं है. 

यूएन महासचिव ने आन्तरिक रूप से विस्थापित व शरणार्थियों से मुलाक़ात की.
UN Photo/Eskinder Debebe
यूएन महासचिव ने आन्तरिक रूप से विस्थापित व शरणार्थियों से मुलाक़ात की.

बारिश कम होने और कृषि उत्पादन वाले इलाक़ों में हमलों की वजह से उपज में कमी आई है.

इन संकटों व हालात की गम्भीरता के बावजूद, निजेर के लिये वर्ष 2022 के मानवीय राहत जवाबी कार्रवाई योजना के तहत अब तक केवल 8.7 फ़ीसदी धनराशि का ही प्रबन्ध हो पाया है.

विस्थापितों के लिये ‘प्रवक्ता’

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ऊआल्लम में आन्तरिक रूप से विस्थापित और माली से आए शरणार्थियों से मुलाक़ात की, जहाँ उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की एकजुटता को व्यक्त किया है.

महासचिव ने उन्हें सीधे सम्बोधित करते हुए कहा कि उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिये वह हर सम्भव प्रयास करेंगे. 

“मैं आपका प्रवक्ता बनूँगा और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से यह मांग करूंगा कि आपको ना सिर्फ़ मानवीय सहायता मुहैया कराई जाए जिसकी आपको ज़रूरत है, बल्कि विकास को भी समर्थन मिले. चूँकि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार सृजन के ज़रिये ही आतंकवाद को हराया जा सकता है.”

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने सचेत किया है कि कुछ आतंकवादी यह कहते हैं कि वे ईश्वर के नाम पर कृत्यों को अंजाम दे रहे हैं. “...यह एक झूठा दावा है.”

महासचिव ने कहा कि इस्लाम के सभी पवित्र ग्रंथों में, हिंसा और एक मुसलमान द्वार अन्य मुसलमान के विरुद्ध लड़ाई छेड़े जाने की निन्दा की गई है.

महासचिव ने निजेर को एक लोकतांत्रिक व सुशासन वाले देश के रूप में सम्बोधित करते हुए, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के नाम एक अपील जारी कर, आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में देश को समर्थन प्रदान करने की बात कही है.

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