अफ़ग़ानिस्तान: हालात गम्भीर, इस वर्ष दो लाख 70 हज़ार नए लोग विस्थापित

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी – UNHCR ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में विदेशी सेनाओं की वापसी और तालेबान की बढ़त के बीच, देश में, जनवरी (2021) से अब तक लगभग दो लाख 70 हज़ार लोगों को अपने घर छोड़कर विस्थापित होने के लिये मजबूर होना पड़ा है.

यूएन शरणार्थी एजेंसी ने मंगलवार को जानकारी दी है कि ताज़ा विस्थापन के बाद, देश के भीतर ही विस्थापितों की कुल संख्या क़रीब 35 लाख हो गई है.

एजेंसी ने बताया है कि बहुत से परिवारों को, ग़ैर-सरकारी सशस्त्र गुटों के हाथों जबरन धन वूसली और मुख्य मार्गों  व सड़कों पर लगीं संवर्धित विस्फोटक डिवाइसों (IEDs) के ख़तरे से बचकर भागना पड़ रहा है.

बहुत से परिवारों ने ये भी बताया है कि उन्हें बढ़ती असुरक्षा के कारण आय में कमी और सामाजिक सुरक्षा सहायता में व्यवधान होने के हालात का भी सामना करना पड़ रहा है.

आपात सहायता

इन आपात ज़रूरतों का सामना कर रहे लोगों की मदद करने के लिये, यूएन शरणार्थी एजेंसी और उसके साझीदार संगठनों ने, विस्थापित अफ़ग़ान लोगों को आपात आश्रय स्थल, भोजन सामग्री, स्वास्थ्य, जल, स्वच्छता साधन और नक़दी सहायता मुहैया कराए हैं. अलबत्ता, बहुत कमज़ोर परिस्थितियों वाले समूहों तक पहुँच बनाना अब भी बहुत चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान में यूएन सहायता मिशन (UNAMA) के अनुसार वर्ष 2021 की पहली तिमाही में, आम लोगों के हताहत होने की संख्या में, उससे पिछले वर्ष की तुलना में, 29 प्रतिशत इज़ाफ़ा दर्ज किया गया है.

निशाना बनाए गए लोगों में महिलाओं और बच्चों की बढ़ी संख्या भी शामिल रही.

यूएन शरणार्थी एजेंसी के प्रवक्ता बाबर बलोच ने जिनीवा में कहा, “जिन लोगों को अचानक भागना पड़ा है, उनकी ज़रूरतें बहुत तात्कालिक हैं.”

बहुत ज़्यादा मुश्किलें

बाबर बलोच ने जिनीवा में पत्रकारों से कहा, “अफ़ग़ानिस्तान में लम्बे समय से चले आ रहे संघर्ष, भारी संख्या वाले विस्थापन, कोविड-19 के विनाशकारी प्रभाव, बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं, जिनमें सूखा भी शामिल है, और गहरी होती निर्धनता जैसे हालात ने, नागरिक आबादी की सहन क्षमता, अन्तिम सीमा तक खींच दी है.”

देश के भीतर और बाहर रहने वाली अफ़ग़ान आबादी में 65 प्रतिशत संख्या बच्चों व युवाओं की है.

बाबर बलोच ने चेतावनी भरे अन्दाज़ में कहा कि मौजूदा हिंसा पर रोक लगाने के लिये अगर अफ़ग़ान सरकार व तालेबान के बीच शान्ति समझौता नहीं होता है तो उन हालात में ना केवल देश के भीतर और भी ज़्यादा विस्थापन होगा, बल्कि बहुत से लोग सुरक्षा की ख़ातिर, पड़ोसी देशों और उससे भी दूर के देशों में पहुँचने की कोशिश करेंगे.

ईरान और पाकिस्तान

विस्थापित अफ़गान नागरिकों की लगभग 90 प्रतिशत संख्या ईरान और पाकिस्तान में रहती है. कुल मिलाकर लगभग 20 लाख अफ़ग़ान शरणार्थी पंजीकृत हैं. 

इन दोनों ही देशों ने अफ़ग़ान शरणार्थियों को रहने के लिये स्थान देने के साथ-साथ सुरक्षा और अपनी राष्ट्रीय व्यवस्थाओं के ज़रिये स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएँ भी उपलब्ध कराई हैं.

प्रवक्ता ने कहा, “दशकों व पीढ़ियों से जारी इन देशों की मेहमान-नवाज़ी और समावेशी नीतियों को मामूली नहीं समझा जा सकता है.”

“यूएन शरणार्थी एजेंसी वैश्विक स्वास्थ्य महामारी कोविड-19 के दौर में और उससे उत्पन्न सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के बीच भी, इन देशों की सरकारों द्वारा, अपने यहाँ शरणार्थियों को पनाह देने के चलन का ज़ोरदार स्वागत करती है...”

मदद व समर्थन बढ़ाएँ

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के प्रवक्ता ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से अफ़ग़ानिस्तान की सरकार, वहाँ के लोगों और पड़ोसी देशों को, इस नाज़ुक व अहम दौर में, एकजुटता व ज़िम्मेदारियाँ बाँटने में, समर्थन व मदद बढ़ाने का ज़ोरदार आग्रह किया है.

अफ़ग़ान स्थिति के साथ-साथ पाकिस्तान व ईरान में मौजूद अफ़ग़ान शरणार्थियों की मदद वाले अभियान चलाने के लिये, एजेंसी की वित्तीय अपील को अभी पर्याप्त धनराशि नहीं मिली है.

लगभग 33 करोड़ 70 लाख डॉलर की राशि की ज़रूरत है मगर उसका केवल 43 प्रतिशत हिस्सा ही इकट्ठा हुआ है.

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