अफ़ग़ानिस्तान: यूएन ने जारी की, अब तक की सबसे बड़ी सहायता अपील

संयुक्त राष्ट्र और भागीदारों ने अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की बुनियादी ज़रूरतों के लिये, मंगलवार को पाँच अरब डॉलर से अधिक की सहायता राशि जुटाने की अपील जारी की है. देश में, अगस्त 2021 में देश की सत्ता पर तालेबान का कब्ज़ा होने के बाद से ही बुनियादी सेवाएँ ध्वस्त हैं, जिससे देश के अन्दर लगभग दो करोड़, 20 लाख लोगों को और देश की सीमा के बाहर, 57 लाख लोगों को मदद की आवश्यकता उत्पन्न हो गई है. 

संयुक्त राष्ट्र के आपातकालीन राहत समन्वयक, मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने जिनीवा में कहा कि केवल अफ़ग़ानिस्तान की मानवीय कार्रवाई योजना के लिये 4 अरब 40 करोड़ डॉलर रक़म की आवश्यकता है, जो किन्हीं अधिकारियों के लिये नहीं, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य कार्यकर्ताओं को धन का "सीधा भुगतान" करने के लिये है.

संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त, फ़िलिपो ग्रैण्डी ने ‘अफ़ग़ानिस्तान के हालात पर क्षेत्रीय शरणार्थी प्रतिक्रिया योजना’ के तहत, पाँच पड़ोसी देशों में शरणार्थियों और मेज़बान समुदायों की मदद के लिये 62 करोड़ 30 लाख डॉलर जुटाने का आहवान किया.

फ़िलिपो ग्रैण्डी ने कहा, "आज हम 2022 में अफ़ग़ानिस्तान के लिये, 4 अरब 40 करोड़ डॉलर की सहायता अपील जारी कर रहे हैं.

मानवीय सहायता के लिये किसी एक देश के लिये की गई यह अब तक की सबसे बड़ी अपील है और अब दरअसल, 2021 में जुटाई गई धनराशि से तीन गुना ज़्यादा की ज़रूरत है.” 

ज़रूरतें दोगुनी हो सकती हैं

संयुक्त राष्ट्र के दोनों अधिकारियों ने ज़ोर देकर कहा कि ज़रूरत का पैमाना पहले से ही बहुत बड़ा है, अगर अफ़ग़ानिस्तान और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया योजनाओं के लिये अब भी कार्रवाई अपर्याप्त रही, तो "अगले साल हालात ये होंगे कि हमें 10 अरब डॉलर की मांग करनी पड़ेगी."

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने कहा: "यह एक अस्थायी उपाय, एकदम आवश्यक अंत:कालीन उपाय है, जिसे हम आज अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रख रहे हैं. इसे वित्त पोषित किए बिना, कोई भविष्य नहीं है, हमें इसे करना ही होगा, अन्यथा प्रस्थापन होगा, अपार पीड़ा देखने को मिलेगी.”

उन्होंने इस सवाल को ख़ारिज किया कि इस धन का इस्तेमाल तालेबान की सरकार की पकड़ मज़बूत करने के लिये होगा.

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने ज़ोर देकर कहा कि यह देश की संरचनाओं के लिये इस्तेमाल नहीं होगा बल्कि सीधे "नर्सों और स्वास्थ्य अधिकारियों के पास जाएगा" ताकि ये सेवाएँ जारी रह सकें.”

संयुक्त राष्ट्र सहायता एजेंसियों के मुताबिक़, अफ़ग़ानिस्तान की दुर्दशा, दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते मानवीय संकटों में से एक है.

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय समन्वय कार्यालय, OCHA के अनुसार, आधी आबादी अब तीव्र भुखमरी का सामना कर रही है, 90 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं और लाखों बच्चे स्कूली शिक्षा से वंचित हैं.

काबुल, अफ़ग़ानिस्तान में, कड़ाके की सर्दी और भोजन की कमी का सामना करते विस्थापित परिवार.
© UNHCR/Andrew McConnell
काबुल, अफ़ग़ानिस्तान में, कड़ाके की सर्दी और भोजन की कमी का सामना करते विस्थापित परिवार.

युवाओं की दुर्दशा

इस प्रश्न पर कि यदि पर्याप्त समर्थन नहीं मिला तो क्या हो सकता है, संयुक्त राष्ट्र के आपातकालीन राहत प्रमुख ने जवाब दिया कि वह विशेष रूप से उन दस लाख बच्चों के लिये चिन्तित हैं जो अब गम्भीर कुपोषण का सामना कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि हम बात कर रहे हैं 10 लाख बच्चों के बारे में, इस तरह के आँकड़ों को समझना बहुत कठिन हो जाता है - लेकिन अगर कार्रवाई नहीं की गई, तो 10 लाख बच्चे इस तरह के कुपोषण के ख़तरे में होंगे, यह बात वाक़ई चौंकाने वाली है."

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने तालेबान के हाथों में पड़े बिना अफ़ग़ान लोगों तक सहायता पहुँचाने का रास्ता साफ़ करने के प्रस्ताव के लिये, 22 दिसम्बर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपने समर्थन को दोहराते हुए समझाया कि मानवीय एजेंसियों और उनके जिन सहयोगियों को सीधे धनराशि मिलेगी, वो इतना ही कर सकते हैं.

उन्होंने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान के अन्दर मानवीय एजेंसियाँ केवल तभी काम कर सकती हैं, जब अर्थव्यवस्था में धन हो, जिसका उपयोग अधिकारियों, वेतन, लागत, ईंधन और आगे का भुगतान करने के लिये किया जा सके. तो, अपने पहले चरण में नक़दी एक मानवीय मुद्दा है, केवल बड़ा आर्थिक मुद्दा नहीं."

भुखमरी व रोगों से बचाव

उन्होंने कहा: "मेरा सन्देश अत्यावश्यक है: अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के लिये दरवाज़ा बन्द मत करो. मानवीय साझीदार ज़मीन पर काम कर रहे हैं, और चुनौतियों के बावजूद वो मदद करने में लगे हैं. आज हम जो मानवीय योजनाएँ शुरू कर रहे हैं, उन्हें समर्थन देकर व्यापक स्तर पर फैली भुखमरी, बीमारी, कुपोषण और मौतों से बचाव करने में हमारी मदद करें.”

यूएनएचसीआर के प्रमुख फ़िलिपो ग्रैण्डी ने, अफ़ग़ानिस्तान से उत्पन्न होने वाले व्यापक क्षेत्रीय संकट से बचने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए ज़ोर देकर कहा कि "अफ़ग़ानिस्तान के अन्दर के हालात स्थिर करने की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, जिसमें देश के अन्दर विस्थापित लोग भी शामिल हैं. साथ ही, एक बड़े शरणार्थी संकट यानि दूसरे देशों में विस्थापन के बड़े संकट को रोकना भी ज़रूरी है.”

 फ़िलिपो ग्रैण्डी ने सुरक्षा, स्वास्थ्य व पोषण, खाद्य सुरक्षा, आश्रय और गैर-खाद्य वस्तुओं, पानी व स्वच्छता, आजीविका व सहनक्षमता, शिक्षा, तंत्र एवं दूरसंचार आदि क्षेत्रों में काम करने वाले 40 संगठनों के लिये, 62 करोड़ 30 लाख के वित्त पोषण की अपील करते हुए कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के निकटतम पड़ोसी देश, दशकों से कमज़ोर अफ़ग़ान लोगों को आश्रय देते आ रहे हैं. 

अफ़ग़ानिस्तान के काबुल शहर में, विस्थापित परिवारों को कड़ाके की सर्दी और भोजन की कमी का सामना करना पड़ रहा है.
© UNHCR/Andrew McConnell
अफ़ग़ानिस्तान के काबुल शहर में, विस्थापित परिवारों को कड़ाके की सर्दी और भोजन की कमी का सामना करना पड़ रहा है.

दशकों से शरण

उन्होंने कहा, किसी को भी यह नहीं भूलना चाहिये कि "इस संकट का एक क्षेत्रीय आयाम है, जिसका प्रतिनिधित्व अफ़ग़ान शरणार्थी तो करते ही हैं, और विशेष रूप से पड़ोसी देशों में 'रहने' की व्यवस्था करने वाले अन्य अफ़ग़ान भी. ख़ासतौर पर, पाकिस्तान और ईरान ने 40 से अधिक वर्षों से अफ़ग़ान लोगों की मेज़बानी की है, और मध्य एशियाई देशों ने भी.”

संयुक्त राष्ट्र की आपदा राहत मामलों की एजेंसी - OCHA ने एक बयान में कहा कि अगस्त 2021 में तालेबान के सत्ता अधिग्रहण के बाद से, महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों पर हमले जारी हैं, "वहीं किसान व चरवाहे दशकों में सबसे ख़राब सूखे का सामना कर रहे हैं और अर्थव्यवस्था चरमरा गई है."

अधिकारों की रक्षा

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने मौलिक अधिकारों की रक्षा के मुद्दे पर इस कहा कि संयुक्त राष्ट्र के मानवीय कार्यकर्ता, राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर, अफ़गानिस्तान के अधिकारियों के साथ सर्वजन के लिये, सहायता और शिक्षा तक पहुँच जैसे मुद्दों पर "बातचीत" करना जारी रखे हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी प्रमुख फ़िलिपो ग्रैण्डी ने इसी सन्देश को दोहराते हुए कहा कि ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले मानवीय कार्यकर्ता, अल्पसंख्यकों और कमज़ोर वर्ग के अन्य अफ़ग़ान लोगों के अधिकारों की रक्षा करने की अहमियत अच्छी तरह समझते हैं.

"हमारे सहयोगी हर समय वहाँ मौजूद हैं, और वे हर दिन यही बात करते हैं; निश्चित रूप से पहुँच, आपूर्ति और ज़रूरतों की बातें तो होती ही हैं, लेकिन साथ ही, कामकाजी महिलाओं, स्कूल में शिक्षण करने वाली महिलाओं - स्कूल जाने वाली लड़कियों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के बारे में भी बात होती है, और ये वो मु्ददे हैं जिन्हें हमारे संरक्षण की आवश्यकता है."

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