अफ़ग़ानिस्तान के लिये एक ‘अति महत्वपूर्ण क्षण’ - विश्व समुदाय से सहायता कार्रवाई की पुकार 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अफ़ग़ानिस्तान में गहराते मानवीय संकट के बीच, देश के लिये इसे एक बेहद अहम लम्हा क़रार देते हुए, विश्व भर से सहायता कार्रवाई का आहवान किया है. उन्होंने आगाह किया है कि अफ़ग़ान नागरिकों को अगर समय रहते मदद नहीं पहुँचाई गई तो इसके गम्भीर नतीजे देखने को मिल सकते हैं. 

यूएन महासचिव ने सोमवार को न्यूयॉर्क में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा, “अगर हम यह कार्रवाई और अफ़ग़ान लोगों को इस तूफ़ान से निपटने में जल्द मदद नहीं करते, तो ना सिर्फ़ उन्हें, बल्कि पूरी दुनिया को इसकी एक भारी क़ीमत चुकानी पड़ेगी.”

ग़ौरतलब है कि मंगलवार को अफ़ग़ानिस्तान में संकट के मुद्दे पर जी20 समूह के देशों की एक बैठक हो रही है जिससे पहले, यूएन प्रमुख ने सहायता की यह पुकार लगाई है. 

फ़िलहाल, देश में एक करोड़ 80 लाख लोगों, यानि देश की क़रीब आधी आबादी हिंसा, आर्थिक बदहाली व अस्थिरता से प्रभावित है. 

यूएन प्रमुख ने सचेत किया कि “बिना भोजन, बिना रोज़गार, बिना उनके अधिकारों की रक्षा के, हम ज़्यादा से ज़्यादा अफ़ग़ान लोगों को, एक बेहतर जीवन की तलाश में अपने घरों को छोड़ता हुए देखेंगे.”

“ग़ैरक़ानूनी ड्रग्स का लेनदेन और आपराधिक व आतंकवादी नैटवर्क बढ़ने की भी सम्भावना है.” 

उन्होंने आगाह किया कि इससे ना केवल अफ़ग़ानिस्तान पर बुरा असर होगा, बल्कि क्षेत्र और शेष दुनिया के लिये भी नकारात्मक नतीजे होंगे. 

बीता जा रहा है समय

अनेक अवरोधों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र ने व्यापक स्तर पर अफ़ग़ानिस्तान में मानवीय सहायता प्रयास जारी रखे हैं.

यूएन प्रमुख ने बताया कि यूएन एजेंसियाँ और अन्य ग़ैर-सरकारी संगठन, सर्दी के मौसम से पहले, जीवनरक्षक सहायता व सामग्री पहुँचाने में जुटी हैं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि राहत प्रयासों में कोई क़सर बाक़ी नहीं छोड़ी जाएगी. 

सितम्बर महीने में ही, 38 लाख से अधिक लोगों को खाद्य सहायता प्रदान की गई है, 21 हज़ार बच्चों व 10 हज़ार महिलाओं का कुपोषण के लिये उपचार किया गया है.  

वहीं 32 हज़ार लोगों को खाद्य सामग्री के अलावा भी कम्बल और सर्दियों के लिये गर्म कपड़े वग़ैरा उपलब्ध कराए गए हैं. 

इसके अतिरिक्त, साढ़े चार लाख लोगों को प्राथमिक व माध्यमिक स्वास्थ्य देखभाल मुहैया कराई गई है, एक लाख 60 हज़ार किसानों और चरवाहों को आजीविका सम्बन्ध सहायता पहुँचाई गई है, और 12 हज़ार लोगों को आपात मनोसामाजिक व मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की गई हैं. 

महासचिव गुटेरेश ने बताया कि राहत अभियान को आगे बढ़ाने के लिये, यूएन एजेंसियाँ, तालेबान के सहयोग से कार्य कर रही हैं.

इस क्रम में, राहत अभियान के दौरान कुछ इलाक़ों में गतिविधियों के लिये चरणबद्ध ढंग से अनुमति प्रदान की गई है और ज़रूरत होने पर सुरक्षा भी मुहैया कराई गई है. 

“मानवीय राहत अभियान के दौरान घटनाओं की संख्या में निरन्तर कमी आ रही है.”

अर्थव्यवस्था में प्राण फूँकना

महासचिव ने दोहराया कि मानवीय राहत के ज़रिये, ज़िन्दगियों की रक्षा करना सम्भव है, मगर यह भी ध्यान रखा जाना होगा कि यदि अफ़ग़ानिस्तान की अर्थव्यवस्था ध्वस्त होती है, तो केवल मानवीय सहायता पहुँचाने से ही, समस्याएँ नहीं सुलझाई जा सकेंगी. 

अगस्त महीने में, देश की सत्ता पर तालेबान का नियंत्रण स्थापित होने से पहले, अफ़ग़ानिस्तान की अर्थव्यवस्था नाज़ुक हालात में थी और पिछले दो दशकों से उसे विदेशी सहायता के ज़रिये चलाया जाता रहा है.

फ़िलहाल, सम्पत्तियाँ ज़ब्त की जा चुकी है और विकास सहायता पर रोक लगा दी गई है. 

यूएन प्रमुख के मुताबिक़, इन हालात में, अफ़ग़ान अर्थव्यवस्था बिखर रही है, बैंक और स्वास्थ्य देखभाल जैसी अतिआवश्यक सेवाएँ, अनेक इलाक़ों में ठप हो रहे हैं. 

“हमें अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिये रास्तों की तलाश करने की ज़रूरत है.”

उन्होंने बताया कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनों के उल्लंघन या सिद्धान्तों पर समझौता किये बिना यह लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है.

रसातल से वापसी

यूएन के शीर्ष अधिकारी के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान में, रसातल से वापिस खींचने का मुख्य दायित्व उनका है, जिनका अफ़ग़ानिस्तान पर नियंत्रण है.

देश से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद, तालेबान ने अफ़ग़ानिस्तान पर फिर से अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया है. 

तालेबान ने अनेक बार सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा का वादा किया है.

महासचिव गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा कि महिलाओं को काम करने, कहीं आने जाने और अपने बुनियादी अधिकारों का इस्तेमाल करने की सम्भावना, इस वादे की बुनियाद में है. 

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने अपने अफ़ग़ानिस्तान दौरे का उल्लेख करते हुए बताया कि अफ़ग़ान महिलाओं व लड़कियों के साहस, सुदृढ़ता और संकल्प से वो बेहद प्रभावित हैं.

एंतोनियो गुटेरेश ने स्पष्ट किया कि तालेबान द्वारा वादे तोड़े जाते हुए देखकर, उन्हें बेहद चिन्ता हुई है. 

महिलाओं व लड़कियों की भूमिका

“वादे नहीं निभाने से अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं व लड़कियों के लिये सपने टूट जाएंगे. महिलाओं व लड़कियों को निर्णय गतिविधियों के केन्द्र में रखे जाने की ज़रूरत है.”

अफ़ग़ानिस्तान की लगभग 80 फ़ीसदी अर्थव्यवस्था अनौपचारिक है, जिसमें मुख्य रूप से महिलाओं का दबदबा है.

वर्ष 2001 से, 30 लाख लड़कियों ने स्कूलों में पंजीकरण कराया है और औसतन, प्राप्त शिक्षा छह वर्ष से बढ़कर 10 वर्ष तक पहुँच चुकी है.

महासचिव ने कहा कि महिलाओं व लड़कियों के बिना, अफ़ग़ान अर्थव्यवस्था और समाज की पुनर्बहाली का कोई रास्ता नहीं है. 

उन्होंने तालेबान से महिलाओं व लड़कियों के लिये किये गए वादे पूरे करने की अपील की है.

साथ ही, अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून और मानवीय क़ानू के तहत उनके दायित्वों के प्रति ध्यान दिलाया है.

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