अफ़ग़ानिस्तान: कुन्दूज़ की एक मस्जिद पर ‘भयावह’ हमले की कठोर निन्दा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के कुन्दूज़ शहर की एक शिया मस्जिद को निशाना बना कर किये गए आत्मघाती बम हमले की कठोरतम शब्दों में निन्दा की है. ख़बरों के अनुसार जुमे की नमाज़ के दौरान हुए इस हमले में 100 से ज़्यादा लोग हताहत हुए हैं. 

यूएन महासचिव के प्रवक्ता की ओर से जारी वक्तव्य में क्षोभ व्यक्त किया गया है कि एक सप्ताह से भी कम समय में धार्मिक केन्द्रों पर यह तीसरा हमला है. 

यूएन प्रमुख ने कहा, “स्वतंत्रतापूर्वक अपने धर्म पालन के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे लोगों को जानबूझकर निशाना बनाया जाना, बुनियादी मानवाधिकारों और अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का उल्लंघन है.”

उन्होंने इस घटना के दोषियों की जवाबदेही तय किये जाने का आग्रह किया है. 

महासचिव ने शोकाकुल परिवारजनों के प्रति अपनी सम्वेदना व्यक्त की हैं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है. 

ख़बरों के अनुसार, आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (दाएश) से सम्बद्ध स्थानीय गुट, इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रान्त (IKSP) ने इस हमले की ज़िम्मेदारी लेने का दावा किया है. 

इससे पहले भी, IKSP ने सुन्नी-बहुल अफ़ग़ानिस्तान में शिया मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया है. 

ग़ौरतलब है कि इस वर्ष अगस्त महीने में अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान ने देश की सत्ता पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था. IKSP को तालेबान के विरोधी गुट के रूप में देखा जाता है.  

ख़ुरासान गुट ने अगस्त महीने में काबुल हवाई अड्डे पर मची अफ़रातफ़री के बीच एक घातक हमला किया था जिसमें 13 अमेरिकी सैन्यकर्मियों सहित 169 अफ़ग़ान नागरिकों की मौत हो गई थी.  

चिन्ताजनक रुझान 

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNAMA) ने ट्विटर पर अपने एक सन्देश में, हाल के दिनों में हमलों में आई तेज़ी को व्यथित कर देने वाला बताया है. 

ट्वीट सन्देश में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र परिवार में, सैयदाबाद शिया मस्जिद पर हुए हमले में हताहतों की बड़ी संख्या की ख़बरों पर गहरी चिन्ता है.

शुक्रवार को शिया मस्जिद पर हुए बम हमले से पहले, गत रविवार को, काबुल की एक मस्जिद पर हमला हुआ था जिसकी ज़िम्मेदारी भी आईएस ख़ुरासान गुट ने ली है. 

बुधवार को ख़ोस्त प्रान्त में एक स्कूल पर भी हमला किया गया था, मगर  इस हमले की ज़िम्मेदारी अभी किसी गुट ने स्वीकार नहीं की है. 

यूएन मिशन का कहना है कि देश में हिंसा का यह रुझान परेशान कर देने वाला है. 

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