अफ़ग़ानिस्तान: आपात सहायता सामग्री की आपूर्ति में बाधा के बारे में अलार्म

संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों ने आगाह करते हुए कहा है कि वो अफ़ग़ानिस्तान में, लोगों के लिये तत्काल ज़रूरतों वाली चीज़ें, देश के भीतर पहुँचाने में असमर्थ हैं. एजेंसियों ने, चिकित्सा सामग्री व अन्य ज़रूरी चीज़ें, देश के भीतर पहुँचाने के लिये, ‘सहायता वायु पुल’ स्थापित किये जाने का आहवान किया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के क्षेत्रीय निदेशक रिचर्ड ब्रेन्नन ने सोमवार को एक मीडिया इण्टरव्यू में कहा कि स्वास्थ्य एजेंसी, काबुल हवाई अड्डे पर लगी पाबन्दियों के कारण, क़रीब 600 टन चिकित्सा सामान, देश के भीतर पहुँचाने में असमर्थ है, जो इस सप्ताह अनेक स्थानों पर मुहैया कराई जानी थी. 

ध्यान रहे कि विदेशी सैनिकों और उनके सहायक कर्मियों को, अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकालने के प्रयासों के कारण, काबुल हवाई अड्डे पर अफ़रा-तफ़री मची हुई है.

अफ़ग़ानिस्तान में, विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की निदेशक मैरी ऐलेन मकग्रोआर्टी का एक वक्तव्य में सोमवार को मीडिया में प्रकाशित हुआ जिसमें, त्वरित संयोजन कार्रवाई किये जाने का आहवान किया गया है; अन्यथा, पहले से ही विकट बनी हुई स्थिति, और भी ज़्यादा ख़राब हो सकती है जोकि एक पूर्ण त्रासदी का रूप ले लेगी, यानि एक विकट मानवीय संकट”.

मैरी ऐलेन मकग्रोआर्टी ने देश के भीतर और ज़्यादा भोजन सामग्री व चिकित्सा सामग्री पहुँचाने की ख़ातिर, तुरन्त धन सहायता मुहैया कराए जाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया है.

“इस काम में अगर छह या सात सप्ताह की भी देरी हुई तो, बहुत ज़्यादा देर हो जाएगी. बहुत से लोगों के पास कुछ भी सामान नहीं बचा है. हमें देश के भीतर तुरन्त भोजन सामग्री पहुँचानी होगी और, इससे पहले कि, बर्फ़बारी के कारण, सड़कें व रास्ते बन्द हो जाएँ, वो भोजन सामग्री, विभिन्न प्रान्तों में समुदायों तक पहुँचानी होगी.”

मानवीय ज़रूरतें बढ़ने की सम्भावना

अफ़ग़ानिस्तान में, हाल के दिनों में, विदेशियों और निर्बल हालात वाले अफ़ग़ान लोगों को, देश से बाहर निकालने पर ज़्यादा ज़ोर रहा है. जबकि पिछले क़रीब दो महीनों के दौरान, देश के भीतर ही, लगभग तीन लाख लोग विस्थापित हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने साथ ही ध्यान दिलाया है कि आबादी के ज़्यादातर हिस्से के सामने दरपेश व्यापक मानवीय सहायता ज़रूरतों को नज़रअन्दाज़ नहीं किया जा सकता है: यहाँ तक कि देश पर हाल ही में, तालेबान द्वारा नियंत्रण स्थापित किये जाने से पहले भी, वहाँ दुनिया के तीसरे सबसे बड़े मानवीय सहायता अभियान की ज़रूरत थी, क्योंकि एक करोड़ 80 लाख से भी ज़्यादा लोगों को, मदद की ज़रूरत रही है.

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हैनरीएटा फ़ोर ने सोमवार को कहा कि आगामी महीनों के दौरान, महिलाओं और बच्चों की ज़रूरतें बढ़ने का अनुमान है क्योंकि देश में सूखा और उसके कारण उत्पन्न हुई पानी की क़िल्लत और कोविड-19 महामारी के कारण स्थिति और भी कठिन हो गई है.

यूएन बाल एजेंसी, अफ़ग़ानिस्तान में, 65 वर्षों से, बच्चों के लिये सहायता मुहैया कराती रही है.

हैनरीएटा फ़ोर ने कहा, “लाखों लोगों को ज़रूरी सेवाओं की ज़रूरत रहेगी जिनमें स्वास्थ्य, पोलियो और ख़सरा से बचाने वाली जीवनरक्षक वैक्सीनों का टीकाकरण, पोषण, संरक्षा, आश्रय, पानी और स्वच्छता चीज़ें शामिल हैं.”

“हाल के वर्षों में, लड़कियों के लिये शिक्षा साधनों की उपलब्धता में, महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है – ये बहुत ज़रूरी है कि ये प्रगति सहेजी जाए. साथ ही, पैरोकारी प्रयास भी जारी रखे जाएँ ताकि अफ़गानिस्तान में सभी लड़कियाँ गुणवत्ता वाली शिक्षा हासिल कर सकें.”

यूनीसेफ़ ने अफ़ग़ानिस्तान में, बच्चों और महिलाओं के लिये, जीवनरक्षक कार्यक्रम बढ़ाए हैं. साथ ही उम्मीद जताई है कि ये कार्यक्रम, ऐसे इलाक़ों में भी चलाए जा सकेंगे जहाँ, अतीत में असुरक्षा के कारण नहीं चलाए जा सके. 

हैनरीएटा फ़ोर ने अब अफ़ग़ानिस्तान पर नियंत्रण स्थापित कर चुके संगठन तालेबान से ये सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि इस एजेंसी और उसके मानवीय सहायता साझीदार संगठनों को, तमाम स्थानों पर मौजूद बच्चों तक, सुरक्षित, निर्बाध और सही समय पर पहुँच हासिल हो.

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